Friday, June 29, 2007

तुम्हाला काही सुचतयं का यापुढे ?

काल अचानक या ओळी सुचल्या... आणि मग गाडी तिथेच अडखळली...तुम्हाला काही सुचतयं का यापुढे ?
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न जाने कबसे आखोंको तेरा इंतजार था..
न जाने कबसे दिलमे तेरा ख्वाब सजा था..

तुम मिले युं लगा अब मंजिल करीब है,
जिंदगी की राह का हमसफर मिल गया..

3 comments:

Circuit said...

How about the following??

जलकर बुझ रही थी मेरी शमे वफा
कोई परवाना आके उसे रोशन कर गया

मनस्विनी said...

वाह वाह... Thanks circuit.
बघु या, यापुढे मला काही सुचतय का...

Prachi said...

तिनका तिनका बिखर गया था मेरा ज़हान
प्यार से किसीने इसे सवार दिया

पुराने तराने भी नही गाये कभी
गीत नया किसीने गाना सिखा दिया